जब से भारत में शेयर बाज़ार में कार्य करने का प्रचलन बढ़ा है, तब से साधारण मनुष्य (जिसे हम मिडिल क्लास भी कह सकते है ) भी  बाज़ार में अपना भविष्य आजमाने लगा है, पर जैसा कि साधारणतया होता है कि वो भारी नुक्सान लेकर बाज़ार से बाहर हो जाता है और अपने भाग्य को दोष देने लगता है, पर क्या यह सही है ? भाग्य को दोष देना? 

इसका जबाब आप इस साधारण से लगने वाले वाक्य से समझ सकते हैं।

अगर भाग्य खराब होता तो आप ना तो मनुष्य ही ना होते, और यदि हैं तो ना आपके पास इतना धन होता कि आप शेयर बाज़ार में कार्य करने की सोचते। 
 

  •  तो फिर क्या कारण है कि जब भी आप बाज़ार में निवेश करने जाते है तभी शेयर का भाव आपके खिलाफ जाने लगता है ?​

 

  • आप किसी शेयर को काफी समय से देख रहे होते हैं, वो आपकी सोच के हिसाब से ही चल रहा होता है, पर जब आप उसमें निवेश या कार्य करते हैं, तभी से वह उलटा चलने लगता है।  

कभी सोचा है आपने ?  गीता के अनुसार "कर्म प्रधान है और भाग्य उप प्रधान है" ये वो पंक्ति है जिससे हरेक मनुष्य सहमत होगा । परन्तु इस बात से भी सहमत होना पड़ेगा कि "समय से पहले व भाग्य से ज्यादा कभी किसी को नहीं मिलता"

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अर्थात कर्म व भाग्य के मेल से ही किसी मनुष्य मात्र को कुछ मिलता है, यदि किसी का भाग्य बलवान नहीं होगा या उसके जीवन के मूल में ही धन योग नहीं होगा, तो उसे अकस्मात धन लाभ भी नहीं होने वाला है । शेयर व कमोडिटी बाज़ार मैं जाने से पहले भविष्य शास्त्र में दी गई पद्धति के अनुसार इस बात का अध्यन करना आवश्यक है कि हमारा धन योग कितना बलिष्ट है । और वह कब बलवती हो रहा है, साधारण तौर पर जो भी मनुष्य (स्त्री हो या पुरुष) इस संसार में है, वो अपना एक निर्धारित भाग्य लेकर पैदा हुआ है । कहावत है "कि जब भगवान ने मुहँ दिया है, तो उसने खाने का भी इंतजाम किया है"।
 
मेरा अपना मानना है कि हर प्राणी मात्र जो इस संसार में है वो एक अच्छा भाग्य लेकर पैदा हुआ है ।​ साधारणतया यह देखा गया है कि जब कोइ मनुष्य शेयर व कमोडिटी बाज़ार में सौदा करता है. और वह नुक्सान में चला जाता है, तब वह अपने भाग्य को दोष देने लगता है, पर वह अपनी कुण्डली उठाकर कभी नहीं देखता, और अगर वह अपनी कुण्डली का निरिक्षण करे तो पायेगा कि उस समय उसका "समय" खराब चल रहा होगा ।
 
मैं यहाँ उसके समय की बात कर रहा हूँ भाग्य की नहीं। मेरा कहने का सीधा सा मतलब है कि "समय" खराब हो सकता है "भाग्य" नहीं कियोंकि अगर भाग्य खराब होता तो वह प्राणी मात्र के शरीर में जन्म नहीं लेता।

अर्थ कुण्डली में हम यही देखते है कि मनुष्य का समय कब खराब चल रहा है और कब सही। कब उसे किस कमोडिटी, सेक्टर या शेयर में फायदा होगा या कब नुक्सान हो सकता है।

Arth Kundli

अर्थ कुण्डली बनाने के लिये हमें तीन बेसिक जानकारीयों की आवश्यकता होती हैं ।​

1. जन्म की तारीख

2. जन्म का समय

3. जन्म का स्थान
 

अर्थ कुण्डली को बनने में करीब 7 दिन का समय लगता है, इसलिए जल्दी ना करें ।

अर्थ कुंडली रिपोर्ट 10 पृष्ठों की कुंडली है, जिसमें आपके शेयर बाजार में कार्य करने के समय और तरीके  के बारे में विस्तार से बताया जाता है। इस कुंडली में आपके आगामी 5 वर्षों की महत्वपूर्ण समय सारणी होती हैं, जिसके माध्यम से आपको यह जानकारी होती है कि कब आपको शेयर बाजार में निवेश करना है, कब आपको शेयर बाजार से दूर रहना है। इस समय सारणी में उस विशिष्ट समय के आधार पर भी विभिन्न सेक्टर का चयन भी बताया जाता है, ताकि आप अपने उपयुक्त समय में सही सेक्टर (शेयर) का चयन कर सकें।

 

अर्थ कुंडली के माध्यम से आपके जीवन के सबसे उपयुक्त समय की भी विशेष जानकारी दी जाती है, ताकि आप उस विशिष्ट समय में अधिकाधिक लाभ ले सकें। 

 

अर्थ बृहत कुंडली रिपोर्ट में लाल किताब कुंडली को भी शामिल किया गया है और इसके प्रभावी उपायों को करने से आप जीवन के संकटों से तुरंत बच सकते हैं। 

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